सामग्री पर जाएं सामग्री पर जाएं
रणनीतिक विश्लेषण

3 डीआरएस तकनीकें तुलना: सही फैसला कैसे बनता है

क्रिकेट में डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले को तकनीक और तीसरे अंपायर की जांच से परखती है। भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख क्रिकेट बाजारों में इसका इस्तेमाल अंतरराष्...

3 नवंबर 2026 5 min read
3 डीआरएस तकनीकें तुलना: सही फैसला कैसे बनता है

3 डीआरएस तकनीकें तुलना: सही फैसला कैसे बनता है

क्रिकेट में डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले को तकनीक और तीसरे अंपायर की जांच से परखती है। भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख क्रिकेट बाजारों में इसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में निष्पक्षता बढ़ाने के लिए होता है। टीम को आमतौर पर फैसला चुनौती देने के लिए 15 सेकंड मिलते हैं, जबकि पारी में सीमित रिव्यू उपलब्ध रहते हैं। गेंद की दिशा देखने के लिए हॉक-आई बॉल ट्रैकिंग, बल्ले से हल्का स्पर्श पकड़ने के लिए अल्ट्राएज और तापीय निशान देखने के लिए हॉट स्पॉट इस्तेमाल किए जाते हैं। एल्बीडब्ल्यू में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट—तीनों चरण निर्णायक होते हैं। करीबी स्थिति में अंपायर कॉल मूल फैसला कायम रखती है। इसलिए डीआरएस अपने-आप फैसला नहीं बदलता; यह उपलब्ध प्रमाण के आधार पर गलती सुधारता है। देखने की सही आदत यही है: पहले मैदानी फैसला याद रखें, फिर हर तकनीकी चरण को अलग-अलग समझें।

Wild West Gold · Free demo

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में तीसरा अंपायर बड़ी स्क्रीन पर डीआरएस समीक्षा देखता हुआ

अंतिम बात क्या है?

डीआरएस अंपायर को हटाने वाली व्यवस्था नहीं, बल्कि निर्णय की दोबारा जांच करने वाला नियंत्रित तंत्र है। बल्लेबाज या कप्तान 15 सेकंड के भीतर दोनों हाथों से “टी” संकेत देता है, फिर तीसरा अंपायर वीडियो, ध्वनि और गेंद की दिशा देखता है। उपलब्ध प्रमाण स्पष्ट न हो तो मूल फैसला बना रहता है।

डीआरएस का पूरा नाम निर्णय समीक्षा प्रणाली है। इसका लक्ष्य हर अपील को उलटना नहीं, बल्कि स्पष्ट मानवीय गलती पकड़ना है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की खेल शर्तों में समीक्षा की संख्या, समय और परिणामों के नियम दिए जाते हैं; ये नियम टेस्ट, एकदिवसीय और टी-20 में अलग हो सकते हैं। आम तौर पर एक टीम को एक पारी में 2 या 3 रिव्यू मिलते हैं, लेकिन किसी खास प्रतियोगिता की शर्त अंतिम मानी जाती है।

यहां एक बात पर नए दर्शक बार-बार ठोकर खाते हैं: सफल रिव्यू और अंपायर कॉल समान चीजें नहीं हैं। सफल रिव्यू में फैसला बदलता है और रिव्यू बच सकता है; अंपायर कॉल में तकनीकी परिणाम करीबी होने के कारण मैदानी अंपायर का फैसला कायम रहता है। क्रिकेट गाइड पर मैच समीक्षा पढ़ते समय इस अंतर को पकड़िए, क्योंकि स्कोरबोर्ड पर केवल “रिव्यू बचा” या “रिव्यू गया” दिखना पूरी कहानी नहीं बताता।

डीआरएस का इस्तेमाल रणनीति भी है। यदि गेंद बल्ले से साफ लगी हो, तो बल्लेबाजी टीम को समीक्षा लेने में देर नहीं करनी चाहिए; लेकिन एल्बीडब्ल्यू में अनुमान लगाकर रिव्यू लेना 15 सेकंड और एक अवसर दोनों गंवा सकता है। मानिए या न मानिए—मैं मानता हूँ, कई कप्तान तकनीक से नहीं, जल्दबाजी से हारते हैं।

अधिक नियम और मैच संदर्भ के लिए यह मार्गदर्शिका देखें।

और जानें

खिलाड़ी और दर्शक वास्तव में क्या देखते हैं?

मैदान पर खिलाड़ी केवल “टी” संकेत और बड़ी स्क्रीन देखते हैं, जबकि तीसरा अंपायर कई अलग-अलग प्रमाणों को क्रम से जांचता है। पहले वह देखता है कि गेंद बल्ले से लगी या नहीं, फिर नो-बॉल और कैच की वैधता पर जाता है, और अंत में एल्बीडब्ल्यू में गेंद के रास्ते का अनुमान लगाया जाता है। इसलिए स्क्रीन पर दिखाई देने वाला अंतिम ग्राफिक पूरी समीक्षा की शुरुआत नहीं, उसका आखिरी निष्कर्ष होता है।

रिव्यू लेने की सामान्य प्रक्रिया इस तरह समझिए:

  1. मैदानी अंपायर आउट या नॉट-आउट का फैसला देता है।
  2. बल्लेबाज या फील्डिंग कप्तान 15 सेकंड के भीतर “टी” संकेत देता है।
  3. तीसरा अंपायर उपलब्ध रिप्ले, अल्ट्राएज, हॉट स्पॉट और हॉक-आई देखता है।
  4. यदि प्रमाण निर्णायक हो, तो फैसला बदला जाता है।
  5. यदि प्रमाण अपर्याप्त या सीमा-रेखा पर हो, तो मूल फैसला कायम रहता है।

कैच की समीक्षा में गेंद का बल्ले से संपर्क और कैच का जमीन से पहले पूरा होना सबसे अहम है। अल्ट्राएज ध्वनि में छोटी चोटी दिखा सकता है, पर हर चोटी बल्ले का किनारा नहीं होती; जूते, जमीन या पैड भी संकेत पैदा कर सकते हैं। हॉट स्पॉट उपलब्ध हो तो वह संपर्क-स्थान पर तापीय निशान दिखाता है, लेकिन धीमी गति का दृश्य फिर भी जरूरी रहता है। एमसीसी के क्रिकेट नियम खेल के मूल कानून देते हैं, जबकि प्रतियोगिता की डीआरएस शर्तें समीक्षा की प्रक्रिया तय करती हैं।

नो-बॉल एक कम चर्चित मगर निर्णायक बिंदु है। यदि गेंदबाज का अगला पैर सीमा से आगे है और उसी गेंद पर कैच लिया गया, तो विकेट मान्य नहीं होगा; तीसरा अंपायर पहले नो-बॉल देख सकता है। कुछ प्रसारणों में यह जांच स्वतः होती है, इसलिए टीम को अलग रिव्यू लेने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन प्रसारण तकनीक और आधिकारिक खेल शर्तों को एक समझना भूल है। क्रिकेट गाइड की खिलाड़ी आंकड़ा रिपोर्ट में ऐसे क्षणों को केवल “कैच छूटा” लिखना अधूरा विश्लेषण होगा।

क्रिकेट में एल्बीडब्ल्यू नियम की पूरी मार्गदर्शिका

अंपायर कॉल को लेकर बहस इसलिए तेज होती है क्योंकि हॉक-आई भविष्यवाणी करता है, कैमरा वास्तविक टक्कर नहीं दिखाता। गेंद का अनुमानित रास्ता पिक्सेल, गति और कोणों से बनाया जाता है; पिचिंग या इम्पैक्ट का छोटा अंतर परिणाम को बदल सकता है। इसीलिए तकनीक को निर्णायक प्रमाण और अनुमानित सीमा—दोनों के रूप में समझना चाहिए, न कि किसी जादुई कैमरे की तरह।

कौन-सी 3 चीजें सबसे ज्यादा मायने रखती हैं?

डीआरएस के परिणाम पर तीन प्रमाण सबसे अधिक असर डालते हैं: बल्ले से संपर्क, एल्बीडब्ल्यू में गेंद का अनुमानित मार्ग और मैदानी अंपायर का प्रारंभिक फैसला। अल्ट्राएज संपर्क की ध्वनि दिखाता है, हॉक-आई गेंद के भविष्य का अनुमान लगाता है और अंपायर कॉल अनिश्चित सीमा में मूल निर्णय को प्राथमिकता देती है।

1. अल्ट्राएज और ध्वनि संकेत

अल्ट्राएज या स्निकोमीटर गेंद के पास से गुजरते समय माइक्रोफोन द्वारा पकड़ी गई ध्वनि को तरंग के रूप में दिखाता है। यदि गेंद बल्ले के किनारे से छूती है, तो दृश्य और ध्वनि में एक ही समय पर बदलाव आ सकता है। मगर दस्ताने, पैड या बल्ले के जमीन से टकराने की आवाज भी संकेत दे सकती है, इसलिए तीसरा अंपायर केवल एक उछाल देखकर आउट नहीं देता।

2. हॉट स्पॉट और संपर्क का तापीय निशान

हॉट स्पॉट इन्फ्रारेड कैमरों से गेंद और बल्ले या पैड के संपर्क के बाद बनने वाले तापीय अंतर को दिखाने की कोशिश करता है। यह तकनीक हल्के किनारे की जांच में उपयोगी हो सकती है, लेकिन हर मैदान, प्रसारण पैकेज या प्रतियोगिता में इसका इस्तेमाल समान नहीं होता। इसलिए दर्शक को हॉट स्पॉट न दिखने पर यह नहीं मानना चाहिए कि समीक्षा अधूरी है; अल्ट्राएज और सामान्य रिप्ले भी निर्णय का हिस्सा हो सकते हैं।

3. हॉक-आई बॉल ट्रैकिंग

हॉक-आई गेंद की गति, उछाल और दिशा के आधार पर बताता है कि गेंद स्टंप तक पहुंचती या नहीं। एल्बीडब्ल्यू में तीन प्रश्न पूछे जाते हैं:

  • गेंद लेग साइड के बाहर तो नहीं पिच हुई?
  • पैड पर टकराव विकेट की दिशा में और वैध क्षेत्र में हुआ?
  • गेंद स्टंप से टकराती या नहीं?
  • बल्लेबाज ने शॉट खेलने का प्रयास किया था या नहीं?

यहां सबसे बड़ा भ्रम “विकेट हिटिंग” को पूर्ण वास्तविकता मानना है। हॉक-आई मॉडल अनुमान देता है और उसकी सीमा-रेखा के भीतर आने पर अंपायर कॉल लागू हो सकती है। 50 प्रतिशत से अधिक स्टंप प्रभावित होने जैसे पुराने लोकप्रिय दावे हर प्रतियोगिता की आधिकारिक व्याख्या नहीं माने जा सकते; दर्शक को हमेशा वर्तमान आईसीसी खेल शर्त देखनी चाहिए। यही वह तकनीकी बारीकी है जिसे अधिकांश सामान्य लेख छोड़ देते हैं।

अब समीक्षा के संकेत, समय-सीमा और रिव्यू गणना को एक साथ समझना उपयोगी होगा।

और जानें

किन असामान्य स्थितियों में डीआरएस उलझाता है?

डीआरएस में सबसे पेचीदा स्थिति तब आती है जब तकनीकी प्रमाण मौजूद हो, लेकिन वह निर्णायक सीमा पार न करता हो। अंपायर कॉल, समय पर संकेत न देना, रिव्यू का समाप्त होना, नो-बॉल जांच और खराब दृश्य-कोण ऐसे मामले हैं जहां दर्शक को अंतिम स्क्रीन से पहले पूरी प्रक्रिया समझनी पड़ती है। यहां भावनाओं से ज्यादा नियम काम करते हैं।

पहली असामान्य स्थिति समय की है। सामान्य अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया में टीम को लगभग 15 सेकंड मिलते हैं, पर टीवी रिप्ले शुरू होने के बाद कप्तान को नया रिव्यू नहीं मिल सकता। यदि बल्लेबाज आउट होने के तुरंत बाद साथी से सलाह करता रहा और संकेत देर से दिया, तो सही शक भी बेकार हो सकता है। दूसरी स्थिति खिलाड़ी की सहमति है: फील्डिंग कप्तान रिव्यू मांगता है, जबकि बल्लेबाज आउट दिए जाने पर संकेत दे सकता है; दर्शक या कोच सीधे समीक्षा नहीं मांग सकते।

तीसरी स्थिति रिव्यू बचने की है। सफल समीक्षा आम तौर पर अवसर बचाती है, जबकि पूरी तरह असफल चुनौती रिव्यू घटाती है। अंपायर कॉल का व्यवहार प्रतियोगिता की मौजूदा शर्तों पर निर्भर करता है, इसलिए 2026 के किसी टेस्ट नियम को पुराने टी-20 नियम पर चिपकाना गलत है। यह छोटा-सा नियम अंतर मैच के अंतिम ओवर में दोबारा समीक्षा उपलब्ध है या नहीं, इसे तय कर सकता है।

क्रिकेट प्रसारण कक्ष में हॉक-आई ग्राफिक और एल्बीडब्ल्यू प्रक्षेपण की विस्तृत स्क्रीन

एक और महत्वपूर्ण किनारा रन-आउट और स्टंपिंग का है। विकेटकीपर के दस्ताने, बेल्स गिरने का क्षण और बल्लेबाज के बल्ले या पैर का क्रीज के पीछे होना फ्रेम-दर-फ्रेम देखा जाता है। गेंद का डेड होना, ओवर समाप्त होना या अगली गेंद शुरू होना समीक्षा की वैधता प्रभावित कर सकता है। इसी तरह कैच में गेंद का जमीन से संपर्क, उंगलियों का नियंत्रण और सीमा-रेखा के पास शरीर की स्थिति अलग-अलग जांची जाती है।

क्रिकेट में रन-आउट और स्टंपिंग के नियम

तकनीकी विफलता भी वास्तविक संभावना है। कैमरा कोण उपलब्ध न हो, अल्ट्राएज में शोर अधिक हो या बॉल ट्रैकिंग शुरू न हो पाए, तो तीसरा अंपायर उपलब्ध दृश्य प्रमाण तक सीमित रहता है। ऐसी स्थिति में समीक्षा अपने-आप सफल नहीं होती; मूल फैसला नियमों के अनुसार कायम रह सकता है। प्रसारण में “तकनीकी समस्या” दिखना और फैसला गलत होना दो अलग बातें हैं—यह फर्क समझना जरूरी है।

क्रिकेट अंपायर संकेत और फैसलों का अर्थ

निष्कर्ष: क्या डीआरएस सचमुच निष्पक्ष है?

डीआरएस स्पष्ट गलती घटाता है, लेकिन पूर्ण निश्चितता की मशीन नहीं है। 15 सेकंड का अनुरोध समय, सीमित रिव्यू, अल्ट्राएज, हॉट स्पॉट, हॉक-आई और अंपायर कॉल मिलकर ऐसी प्रणाली बनाते हैं जिसमें मानव निर्णय और तकनीकी अनुमान दोनों मौजूद रहते हैं। इसलिए सही सवाल “तकनीक ने फैसला क्यों नहीं बदला” नहीं, बल्कि “कौन-सा प्रमाण निर्णायक था” होना चाहिए।

क्रिकेट गाइड के मैच विश्लेषण में डीआरएस को समझने का सबसे अच्छा तरीका है: पहले मैदानी फैसला नोट करें, फिर बल्ले का संपर्क, नो-बॉल, एल्बीडब्ल्यू के तीन चरण और अंपायर कॉल को क्रम से देखें। कप्तान के लिए व्यावहारिक नियम सीधा है—साफ किनारे या स्पष्ट नो-बॉल पर तुरंत प्रतिक्रिया, लेकिन संदिग्ध एल्बीडब्ल्यू पर कोण और बल्लेबाज के शॉट का ध्यान। 2026 में तकनीक बेहतर हो सकती है, मगर नियम पढ़े बिना बेहतर स्क्रीन भी अधूरी समझ देती है। मानिए या न मानिए—मैं मानता हूँ, डीआरएस निष्पक्षता का मजबूत औजार है, निष्पक्षता की गारंटी नहीं।

अगली मैच समीक्षा और नियम-आधारित विश्लेषण के लिए यहां से जानकारी लेते रहें।

और जानें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्रिकेट में डीआरएस क्या होता है?

उत्तर: डीआरएस मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी समीक्षा करने वाली निर्णय प्रणाली है। इसमें तीसरा अंपायर वीडियो रिप्ले, अल्ट्राएज, हॉट स्पॉट और हॉक-आई बॉल ट्रैकिंग का उपयोग कर सकता है। इसका उद्देश्य हर फैसले को बदलना नहीं, बल्कि स्पष्ट गलती सुधारना है। अंतरराष्ट्रीय मैचों में समीक्षा की संख्या और प्रक्रिया आईसीसी की लागू खेल शर्तों से तय होती है।

प्रश्न: डीआरएस कैसे लिया जाता है?

उत्तर: खिलाड़ी या कप्तान फैसले के लगभग 15 सेकंड के भीतर दोनों हाथों से “टी” संकेत देकर रिव्यू मांगता है। बल्लेबाज आउट दिए जाने पर संकेत दे सकता है, जबकि फील्डिंग कप्तान नॉट-आउट फैसले को चुनौती देता है। समय समाप्त होने के बाद अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाता, इसलिए कप्तान को साथी खिलाड़ियों से तेज और स्पष्ट सलाह लेनी चाहिए।

प्रश्न: डीआरएस और अंपायर कॉल में क्या अंतर है?

उत्तर: डीआरएस तकनीकी जांच की पूरी प्रणाली है, जबकि अंपायर कॉल करीबी परिणाम में मूल मैदानी फैसले को कायम रखने का नियम है। एल्बीडब्ल्यू में गेंद की पिचिंग, इम्पैक्ट या विकेट-हिटिंग सीमा-रेखा पर हो सकती है। ऐसे मामले में हॉक-आई अनुमान दिखाता है, लेकिन तीसरा अंपायर मैदानी अंपायर के निर्णय को बरकरार रखता है।

प्रश्न: डीआरएस में रिव्यू कब खत्म होता है?

उत्तर: रिव्यू आम तौर पर तब खत्म होता है जब टीम की चुनौती असफल हो और फैसला बदलने योग्य स्पष्ट प्रमाण न मिले। सफल रिव्यू में अवसर बच सकता है, जबकि अंपायर कॉल का प्रभाव प्रतियोगिता की मौजूदा खेल शर्तों पर निर्भर करता है। टेस्ट, एकदिवसीय और टी-20 में रिव्यू की संख्या अलग हो सकती है, इसलिए आधिकारिक नियम देखना जरूरी है।

प्रश्न: एल्बीडब्ल्यू डीआरएस में कौन-कौन से चरण देखे जाते हैं?

उत्तर: एल्बीडब्ल्यू समीक्षा में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट-हिटिंग तीन मुख्य चरण देखे जाते हैं। इसके बाद यह भी जांचा जाता है कि गेंद लेग साइड के बाहर तो नहीं पिच हुई और बल्लेबाज ने शॉट खेलने का प्रयास किया था या नहीं। हॉक-आई अंतिम दिशा का अनुमान देता है, लेकिन करीबी परिणाम में अंपायर कॉल लागू हो सकती है।

प्रश्न: अल्ट्राएज और हॉट स्पॉट में क्या फर्क है?

उत्तर: अल्ट्राएज ध्वनि तरंग से बल्ले या दूसरे संपर्क का संकेत खोजता है, जबकि हॉट स्पॉट इन्फ्रारेड कैमरे से संपर्क का तापीय निशान दिखाने की कोशिश करता है। दोनों तकनीकों की उपलब्धता प्रसारण और प्रतियोगिता पर निर्भर कर सकती है। इसलिए हॉट स्पॉट न दिखने का अर्थ यह नहीं कि समीक्षा अमान्य है; सामान्य रिप्ले और अल्ट्राएज भी निर्णायक हो सकते हैं।

प्रश्न: डीआरएस काम न करे तो क्या होता है?

उत्तर: तकनीकी खराबी में तीसरा अंपायर उपलब्ध वीडियो और अन्य प्रमाण के आधार पर निर्णय करता है, और स्पष्ट प्रमाण न मिलने पर मूल फैसला कायम रह सकता है। कैमरा कोण, ध्वनि संकेत या बॉल ट्रैकिंग उपलब्ध न होने से समीक्षा की सीमा घटती है। तकनीकी समस्या अपने-आप रिव्यू को सफल नहीं बनाती और न ही मैदानी अंपायर का फैसला स्वतः गलत साबित करती है।

इस रणनीतिक विश्लेषण को पढ़ने के लिए धन्यवाद।

क्रिकेट गाइड · High-Stakes Insights · Strategic Excellence

संबंधित लेख